CLASS 11 Study Material ( कक्षा 11 अध्ययन सामग्री )

The link To CLASS 11 Study Material is based on CGBSE’s Syllabus 2021. These study materials can be used for students of Chhattisgarh School.

For All schools of Chhattisgarh state: In this Section, the students will be provided study materials from class 11 in Hindi with pictorial study of content, comprehension questions, YouTube videos, PDF free download, essential foreknowledge, and inherent skills run by CGBSE.

Biology

जीव जगत की विविधता

जीव जगत

सजीव क्या है ?, जैव-विविधता, वर्गीकरण की आवश्यकता, जीवन के तीन स्वरूप, वर्गिकी एवं वर्गीकरण विज्ञान, प्रजाति की अवधारणा एवं वर्गिकी के पदानुक्रम, द्विनाम नामकरण पद्धति, वर्गिकी के अध्ययन के उपकरण संग्रहालय, जन्तु उद्यान, हर्बेरियम एवं वानस्पतिक उद्यान ।

जैविक वर्गीकरण

पाँच जगत वर्गीकरण, मोनेरा, प्रोटिस्टा एवं कवक जगत के महत्वपूर्ण लक्षण एवं प्रमुख समूहों तक वर्गीकरण।

लाइकेन्स, विषाणु एवं वायरॉइड्स।

पादप-जगत

पौधों के विशिष्ट लक्षण एवं मुख्य समूहों— शैवाल, ब्रायोफाइटा, टेरिडोफाइटा, जिम्नोस्पर्मी एवं ऐंजिओस्पर्मी में वर्गीकरण (प्रत्येक समूह के तीन से पाँच विशिष्ट एवं विभेदक लक्षण एवं प्रत्येक सूमह के दो उदाहरण) । आवृत्तबीजी पौधे-वर्ग तक वर्गीकरण, विशिष्ट लक्षण एवं उदाहरण ।

जन्तु जगत

संघ स्तर तक अकशेरुकी तथा वर्ग स्तर तक कशेरुकी जन्तुओं के सामान्य लक्षण एवं वर्गीकरण ।

पादप एवं जन्तुओं का संरचनात्मक संगठन

पुष्पीय पादपों की आकारिकी

आकारिकी एवं रूपान्तरण- जड़, तना, पत्ती को संरचना एवं रूपान्तरण, पुष्प, पुष्पक्रम, फल, बीज और इनके प्रकार ।

पुष्पीय पादपों की आन्तरिकी

आन्तरिकी पादप ऊतक, पुष्पीय पौधों के विभिन्न भागों (जड़, तना एवं पत्ती) की आंतरिक संरचना एवं कार्य ।

प्राणियों का संरचनात्मक संगठन

जन्तु ऊतक, एक कोट (तिलचट्टा) की आकारिकी, शारीरिकी एवं विभिन्न तंत्रों (पाचक, परिवहन, श्वसन, • तंत्रिका एवं प्रजनन तंत्र) के कार्य।

कोशिका संरचना एवं कार्य

कोशिका -जीवन की इकाई

कोशिका जीवन की इकाई के रूप में, कोशिका सिद्धान्त। प्रोकैरियोटिक तथा यूकैरियोटिक कोशिका की संरचना, पादप एवं जन्तु कोशिका कोशिकीय आवरण- कोशिका भित्ति, कोशिका झिल्ली। कोशिकांग-रचना तथा कार्य–नाभिक, माइटोकॉण्ड्रिया, प्लास्टिड्स, एन्डोप्लाज्मिक रेटीकुलम, गॉल्गीकाय, राइबोसोम, लाइसोसोम, माइक्रोट्यूयूल्स, सेन्ट्रियोल तथा रसधानी कोशिका कंकाल, सीलिया, कशाभिका तथा अन्य अन्तःकोशिकीय पदार्थ। केन्द्रक, केन्द्रक झिल्ली, क्रोमैटिन जाल, केन्द्रिका ।

जैव-अणु

जीवित कोशिकाओं के रासायनिक संघटक, जैव-अणु, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स, लिपिड्स, नाभिकीय अम्लों की संरचना एवं कार्य एन्जाइम प्रकार, गुण एवं एन्जाइम क्रिया ।

कोशिका चक्र एवं कोशिका विभाजन

कोशिका चक्र, कोशिका विभाजन असूत्री, समसूत्री एवं अर्धसूत्री कोशिका विभाजन एवं उसका महत्व।

पादप कार्यिकी

पौधों में परिवहन

पौधों में परिवहन, जल, गैसों एवं पोषकों का परिवहन, कोशिका से कोशिका में परिवहन, विसरण, सक्रिय स्थानांतरण, पादप-जल संबंध, अंतःचूषण, जल विभव, परासरण, रसाकुंचन, लम्बी दूरी तक जल का परिवहन, अवशोषण, एपोप्लास्ट, सिम्प्लास्ट, वाष्पोत्सर्जन कर्षण, मूल दाब एवं बिन्दु ग्रावण, वाप्पोत्सर्जन, रंथों का खुलना एवं बंद होना, खनिज पोषकों का अवशोषण एवं स्थानांतरण, भोजन का परिवहन (फ्लोयम परिवहन), द्रव्य- प्रवाह परिकल्पना, गैसों का विसरण।

खनिज पोषण

आवश्यक खनिज, दीर्घ एवं सूक्ष्ममात्रक पोषक एवं उनकी भूमिका, कमी के लक्षण, खनिज विषाक्तता, खनिज घोषण के अध्ययन के लिए एक विधि के रूप में हाइड्रोपोनिक्स की सामान्य जानकारी, नाइट्रोजन उपापचय, नाइट्रोजन चक्र, जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण।

उच्च पौधों में प्रकाश संश्लेषण

प्रकाश संश्लेषण स्वयंपोषण की एक विधि के रूप में महत्त्व, प्रकाश संश्लेषण का स्थल (पर्णहरिम को संरचना का कार्यात्मक पहलू), प्रकाश-संश्लेषण की प्रकाश रासायनिक एवं जैव-संश्लेषक प्रावस्थाएँ, इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण तंत्र, फोटोफॉस्फोरिलेशन (चक्रीय एवं अचक्रीय ), C, एवं C. चक्र, रसायन परासरी परिकल्पना, प्रकाश श्वसन, प्रकाश संश्लेषण को प्रभावित करने वाले कारक।

पौधों में श्वसन

गैसों का आदान-प्रदान, कोशिकीय श्वसन ग्लाइकोलिसिस, TCA चक्र एवं इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र (वायवीय), ऊर्जा संबंध, उत्पादित ATP को संख्या, एम्फीबोलिक पथ, पेन्टोज फॉस्फेट पथ, अवायवीय श्वसन, श्वसन भागफल, किण्वन।

पादप वृद्धि एवं विकास

बीज अंकुरण, पादप वृद्धि की अवस्थाएँ एवं पादप वृद्धि दर वृद्धि की स्थितियाँ, विभेदन, विविभेदन एवं पुनर्विभेदन, पौधों में विकास के चरण, वृद्धि नियंत्रक ऑक्जिन, जिबरेलिन, सायटोकाइनिन, इथिलीन, ABA, बीज प्रसुप्ति, दीप्तिकालिता एवं बसंतीकरण ।

मानव कार्यिकी

पाचन एवं अवशोषण

आहारनाल एवं पाचक ग्रंथियाँ, पाचक एवं गैस्ट्रोइन्टेस्टाइनल हॉर्मोन्स की भूमिका, क्रमाकुंचन, पाचन, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स एवं वसा का अवशोषण एवं स्वांगीकरण, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट एवं वसा का कैलोरिफिक मान, बहिष्करण पोषण एवं पाचक विकार-PEM, अपच, कब्जियत, उल्टी, पीलिया, डायरिया आदि।

श्वासोच्छवास एवं पैसों का आदान-प्रदान

जन्तुओं के श्वसनांग, मनुष्य का श्वसन तंत्र, मनुष्य में श्वासोच्छ्वास एवं उसका नियमन, गैसों का आदान-प्रदान, गैसों का परिवहन एवं स्वसन का नियंत्रण, श्वसन (फुफ्फुसीय ) आयतन, श्वसन से संबंधित विकार अस्थमा, एम्फीसीमा, आक्यूपेशनल श्वसन विकार।

शारीरिक द्रव एवं परिसंचरण

रुधिर का संघटन, रक्त समूह, रुधिर का थक्का जमना, लसीका का संघटन एवं कार्य, मानव परिसंचरण तंत्र-मानव हृदय एवं रुधिर वाहिकाओं की संरचना, हृदयक चक्र, कार्डियक आउटपुट, इलेक्ट्रोकार्डिओग्राफ, दोहरा परिसंचरण, हृदयक क्रिया का नियंत्रण, परिसंचरण तंत्र के विकार, उच्च तनाव, कोरोनरी धमनी रोग, एंजाइना पेक्टोरिस, हृदयाघात ।

मानव कार्यिकी

उत्सर्जी उत्पाद एवं उनका निष्कासन

उत्सर्जन की विधियाँ – अमीनोटेलिज्म, यूरियोटेलिज्म तथा यूरिकोटेलिज्म, मनुष्य में उत्सर्जन तंत्र – संरचना एवं कार्य, मूत्र का निर्माण, मूत्र का रासायनिक संघटन, परासरण नियमन, वृक्क के कार्यों का नियमन रेनिन, जिओटेन्सिन एट्रीयल नैट्रीयूरेटिक कारक, ADH एवं डायबिटीज इन्सीपिडस, उत्सर्जन में अन्य अंगों की भूमिका, विकार-यूरोमिया, वृक्क पतन, रीनल कैल्कुलाई, नेफ्राइटिस, डायलिसिस एवं कृत्रिम गुर्दा ।

प्रचलन एवं गति

गति के प्रकार- पक्ष्माभिकीय, कशाभिकीय एवं पेशीय गति, कंकालीय पेशी संकुचनशील प्रोटीन एवं पेशीय संकुचन, कंकाल तंत्र एवं उसके कार्य, संधियों, पेशीय एवं कंकालीय तंत्र के विकार मायेस्थेनिया ग्रेविस, टिटैनी, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, आर्द्राइटिस, ऑस्टियोपोरोसिस, गॉट।

तंत्रिकीय नियंत्रण एवं समन्वय

न्यूरॉन एवं तंत्रिकाएँ, मनुष्य में तंत्रिका तंत्र- केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र, परिधीय तंत्रिका तंत्र एवं स्वाधीन या स्वायत्त तंत्रिका तंत्र, तंत्रिकीय आवेगों को उत्पत्ति एवं संवहन, प्रतिवर्ती क्रिया, संवेदांगी अनुभूति-संवेदांग, आँख एवं कान की सामान्य संरचना एवं कार्य।

रासायनिक समन्वय तथा एकीकरण

अन्तःस्रावी ग्रंथियाँ एवं हॉर्मोन्स, मनुष्य का अन्तःस्रावी तंत्र, हाइपोथैलेमस ग्रंथि, पीयूष ग्रंथि, पिनीयल कॉय, थॉयराइड ग्रंथि, पैराथायरॉइड ग्रंथि एड्रीनल ग्रंथि, अग्नाशय एवं जनद ग्रंथियाँ हॉर्मोन्स की क्रियाविधि , संदेशवाहक एवं नियमक के रूप में हॉर्मोन्स की भूमिका, अल्प एवं अति सक्रियता एवं संबंधित विकार- बौनापन, एक्रोमैगेली, क्रिटिनिज्म, ग्वायटर, एक्जोप्यैल्मिक ग्वायटर, मधुमेह, एडीसन रोग।